जेब में नहीं थी एक फूटी कौड़ी, बेटी के बेट में उठ रहा था भंयकर दर्द, मजदूर पिता बेटी को कंधे पर उठाकर 26 किमी तक पैदल चला

बीमार बेटी को कंधे पर उठाकर मोहम्मद रफी 26 किमी तक पैदल चले और हॉस्पिटल में बेटी को भर्ती कराया और वापस भी इसी तरह पैदल चलकर आए। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गोवंडी में एक झुग्गी बस्ती में रहने वाले मोहम्मद रफी रसोइया के रूप में कार्य करते थे लेकिन लॉकडाउन के चलते उनका काम बंद हो गया।

उन्होंने कहा कि, गुरुवार को बेटी के पेट में अचानक दर्द उठा जिसके करण वह बिस्तर से उठ भी नहीं पा रही थी। बेटी को दर्द में देखकर रफी से नहीं रहा गया तो उन्होंने अपने कमजोर कंधे पर ही बेटी को बैठा लिया और भरी दोपहरी पैदल चलते हुए गोवंडी से परेल तक का रास्ता नापा।

अपनी बेटी को कंधे पर बिठाए हुए मोहम्मद रफी 26 किमी तक चलते रहे और केईएम अस्पताल में उसे भर्ती कराया। अस्पताल पहुंचे रफी बुरी तरह हांफ रहे थे। टूटी-फूटी आवाज में उन्होंने कहा कि उनके पास साधन के लिए पैसे नहीं थे। काम बंद पड़ा है, बड़ी मुश्किल से घर की जरूरत का सामान मिल पा रहा है।

मोहम्मद रफी केईएम में मुफ्त इलाज के लिए अपनी बेटी को कंधे पर ही बिठाकर वापस चल दिए और फिर वापस घर तक भी पैदल ही आए। आपको बात दें कि देश में लॉकडाउन जारी है ताकि जानलेवा कोरोना वायरस का संक्रमण फैल न पाए। लेकिन इस लॉकडाउन के दौरान काफी लोगों को दिक्कतें उठानी पड़ रही है।

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