असंवैधानिक विभाजनकारी नागरिकता संशोधन विधेयक देश के खिलाफ- रिहाई मंच

लखनऊ: रिहाई मंच ने व्यापक जन विरोध के बावजूद विवादास्पद और विभाजनकारी नागरिकता संशोधन विधेयक को बहुमत के नशे में लोकसभा के पटल पर रखे जाने को सत्ता अहंकार और जन भावनाओं का निरादर बताया।

रिहाई मंच नेता रॉबिन वर्मा ने कहा कि देश की बहुसंख्य जनता इस विधेयक के खिलाफ है। लोकसभा में विधेयक प्रस्तुत करते समय कांग्रेस द्वारा धार्मिक आधार पर भेदभाव के आरोप से भड़के गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस को धर्म के आधार पर देश के विभाजन की याद दिलाई और उसके लिए कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस या किसी दल और समूह के गुनाहों की सज़ा जनता को नहीं दी जा सकती। उन्होंने याद दिलाया कि देश का विभाजन दो राष्ट्र के सिद्धान्त पर हुआ था और श्यामा प्रसाद मुखर्जी और सावरकर समेत संघ के तमाम बड़े नेताओं ने मुस्लिम लीग के इस प्रस्ताव का स्वागत किया था। धर्म के आधार पर देश के बटवारे के कारण निर्मित सभी देशों की जनता साम्प्रदायिक दंगों और धर्म के नाम पर उत्पीड़न अब तक झेल रही है जिसे कम से कम अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बंग्लादेश की हद तक गृहमंत्री ने भी सदन में स्वीकार किया है। यह अपने आपमें धर्म के आधार पर नागरिकता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर निर्णय नहीं लेने का कारक होना चाहिए था।

स्वतंत्र भारत में राज्यों की सीमा निर्धारण के समय भी धार्मिक आधार को खारिज किया गया था। भाजपा ने इस विवादास्पद विधेयक के पारित करवाने की ज़िद बांधकर व्यवहारिक रूप से संविधान की प्रस्तावना को ही फाड़ने का काम किया है। रॉबिन वर्मा ने कहा कि रिहाई मंच विपक्षी दलों से अपेक्षा करता है कि इस विभाजनकारी विधेयक का सदन में मजबूती के साथ विरोध करेंगे। 

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