जब एक मुस्लिम व्यक्ति के कारण हुई थी, ताकतवर नेता अमित शाह को जेल, हत्या, अपहरण और जबरन वसूली के लगे थे आरोप

आपको बता दें कि देश के सबसे ताकतवर कहलाए जाने वाले नेता अमित शाह को 25 जुलाई 2010 को सोहराबुद्दीन मामले में गिरफ्तार किया गया था। उनपर हत्या, जबरन वसूली और अन्य आरोपों के बीच अपहरण का आरोप लगे थे। एक समय में, अमित शाह को गुजरात के मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में से एक माना जा रहा था। हालांकि, गिरफ्तारी के बाद उनके राजनीतिक करियर को चोट पहुंची थी। गुजरात सरकार में कई नेताओं ने खुद को उससे दूर कर लिया था उनके साथी मंत्री उन्हें एक निरंकुश व्यक्ति मानने लगे थे, जिनके उनके सहयोगियों के साथ अच्छे संबंध नहीं थे।

जब शाह ने अपनी जमानत के लिए आवेदन दिया था। तो सीबीआई इस चिंता में थी कि शाह अपनी राजनीतिक शक्ति का इस्तेमाल न्याय को रोकने के लिए कर सकते है ।

गुजरात उच्च न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी के तीन महीने बाद 29 अक्टूबर 2010 को उन्हें जमानत दी। हालांकि, अगले दिन, जब अदालतें बंद हो गईं, न्यायमूर्ति आफताब आलम ने उन्हें गुजरात में प्रवेश करने से रोकनस पर एक याचिका भी देदी थी। इस प्रकार शाह को 2010 से 2012 तक जबरन राज्य से निर्वासित कर दिया गया। वह और उनकी पत्नी दिल्ली के गुजरात भवन के एक कमरे में चले गए थे।

बाद में सुप्रीम कोर्ट दवारा सीबीआई की याचिका पर उनकी जमानत रद्द कर दी गई। फिर सितंबर 2012 में, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत पर बारी किया था। , और उन्हें गुजरात लौटने की अनुमति मिली। फिर उन्होंने नारनपुरा निर्वाचन क्षेत्र से 2012 का विधानसभा चुनाव लड़ा और जीते भी हासिल की।

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