जामिया यूनिवर्सिटी के साथ इतनी बर्बरता क्यों- रविश कुमार

जामिया मिल्लिया के साथ ऐसा मत कीजिए। अंतरात्मा भी कोई चीज़ होती है। आदेश ही सब नहीं होता है। छात्रों की तरफ़ से जो वीडियो आए हैं उसमें आपकी क्रूरता झलकती है। प्लीज़ ऐसा मत कीजिए। एक बस की आग का सहारा लेकर ऐसा नहीं करना था। आपके होते आग कैसे लगी ? जब बस में आग लगाने वाली वो भीड़ बेक़ाबू थी तब तो ऐसा बर्बर हमला नहीं किया। क्या वहाँ भीड़ नहीं थी? बस की आग के नाम पर शाम का फ़ायदा उठाकर आप लोग हास्टल और कैंपस में घुसकर मार रहे हैं यह बर्बरता है। ऐसा मत कीजिए। उन नेताओं को याद रखिए जिन्होंने आपकी डीसीपी मोनिका भारद्वाज का साथ नहीं दिया। वो आपका भी साथ नहीं देंगे।

छात्रों से अपील है कि शांति बनाए रखें। वो एक ऐसे दौर में है जब पुलिस से भी बर्बर मीडिया हो गया है। पूरी कोशिश कीजिए कि कोई भी तत्व हिंसा न करे। कौन बाहरी है उस पर खुद नज़र रखें। हो सके तो शाम के वक्त आंदोलन न करें। अंधेरे का फ़ायदा हमेशा ताकतवर को मिलता है।

सभी पक्षों अपील है कि हिंसा का लाभ इस वक्त किसे होगा आप समझते हैं। इसलिए खुद नज़र रखें। हिंसा न होने दें। कोई भी फ़ार्मेशन ऐसा बनाएं जिसमें कोई अनजान पास भी न आ सके। अगर ऐसा नहीं कर सकते हैं तो प्रदर्शन न करें। छात्रों से अपील है कि शांति और अहिंसा का इम्तहान उन्हें देना है। पुलिस और मीडिया को नहीं। यह कैसे करना है उन्हें सोचना होगा।

नागरिकों से अपील है कि वे तटस्थ होकर देखें कि किस तरह जामिया के छात्रों के साथ नाइंसाफ़ी हुई है। ऐसा मत कीजिए। ये ज़ुल्म आने वाले समय में भारत के लोकतंत्र के ख़ात्मे की कहानी लिख रहा है। आप इस कहानी को मत लिखने दें। बाद में कोई अफ़सोस लायक़ भी नहीं बचेगा। हिंसा की कहानी से किसे फ़ायदा होता है आप जानते हैं ।

इस तरह से यूनिवर्सिटी पर हमला करना आपकी अकेली और समूह की आवाज़ को कुचलना है। सौ बार कह चुका है कि इस वक्त आप जिन अख़बारों और टीवी चैनलों को अपने पैसे से ज़हर पीला रहे हैं और वो आपको पीला रहे हैं उनसे दूर रहें। ज़िम्मेदारी निभाइये। जामिया से भी सख़्त सवाल करें और पुलिस से भी। वीसी की इजाज़त के बग़ैर कैंपस में पुलिस कैसे आ गई? ये सवाल वीसी से भी करें। (रविश कुमार)

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