‘Google pay’ बिना आरबीआई की मंजूरी के दे रहा था सर्विस, दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर RBI से माँगा जवाब

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नई दिल्ली: 10 अप्रैल को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस राजेन्द्र मेनन और जस्टिस ए जे भामभानी की पीठ ने आरबीआई से सवाल किया की कैसे बिना मंजूरी के गूगल एप ‘जी पे’ वित्तीय लेन-देन की सुविधा मुहैया करा रहा है।

अभिजीत मिश्र ने याचिका दायर कर यह दावा किया था की गूगल एप ‘जी पे’ बिना आरबीआई के मंजूरी के वित्तीय लेन-देन की सुविधा मुहैया करा रहा है। जिस पर आज 10 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट की एक बेंच ने आरबीआई से पूछा, ‘‘वह बिना मंजूरी के कैसे काम कर रहे हैं।’’ वही इस मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने गूगल इंडिया तथा आरबीआई को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट 29 अप्रैल को करेगी।

अभिजीत मिश्र की याचिका में दावा किया गया है, ‘‘जी पे की भारत में भुगतान और निपटान प्रणाली के रूप में अनाधिकृत परिचालन के जरिये बिना किसी निगरानी के ही लोगों के आधार, पैन, वित्तीय लेन-देन आदि से जुड़ी सूचनाओं तक पहुंच है।’’ साथ ही याचिका में कहा गया है की आरबीआई निर्देश जारी कर गूगल एप ‘जी पे’ सर्विस पर तुरंत रोक लगाए।

याचिका के अनुसार भुगतान प्रणाली परिचालकों से जुड़े एक सवाल में आरबीआई ने बताया था की इस तरह की सर्विस देने के लिए नियामक की मंजूरी जरुरी है। साथ में यह भी कहा गया था की गूगल एप ‘जी पे’ सर्विस अधिकृत भुगतान प्रणाली की सूची में शामिल नहीं है। भीम आधार की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक, 30 मार्च 2019 के डेटा के अनुसार जी पे भीम आधार एप का सूचीबद्ध पार्टनर नहीं है।

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