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‘खाना तो मिल जाएगा साहब, एक पुरानी चप्पल दे दो’, गरीब मजदूर की बाते सुनकर निकल आएंगे आपके आंसू

गोरखपुर पिपराइच के रहने वाले त्रिलोकी की मांग सुन आपके आँखों में आँसू आ जायेंगे। त्रिलोकी पैरों पर हुए फोड़े को दिखाते हुए कहते है की उन्हें ‘खाना तो मिल जाएगा, साहब एक पुरानी चप्पल दे दो’, त्रिलोकी की ये माँग आपका दिल बैठाने के लिए काफी है। ऐसी ही हजारो त्रिलोकी की मांग रोज सुनने को मिलती है।

त्रिलोकी बताते है की सूरत में वह एक कपड़ा मिल में काम करते थे। लेकिन लॉकडाउन की वजह से बेरोजगार बैठे थे। एक हफ्ते श्रमिक ट्रेन का इंतेज़ार करने के बाद पैदल ही घर जाने का फैसला किया। त्रिलोकी ने बताया कि, “मैंने खुद को श्रमिक ट्रेन के लिए पंजीकृत किया और एक सप्ताह तक इंतजार किया। किसी ने फोन नहीं किया और आखिरकार हमने घर वापस जाने का फैसला किया। किसी अनजान जगह पर मरने की बजाय घर पर मरना बेहतर है।”

त्रिलोकी सूरत से तो पैदल निकले अपनी मंजिल की तरफ लेकिन यूपी के बॉर्डर में आते ही उनकी चप्पलों ने जवाब दे दिया। उन्होंने कहा, “मैं नंगे पैर चल रहा हूं और मेरे फोड़े से भी खून बह रहा है। मुझे अभी भी 300 किलो मीटरसे ज्यादा चलना है।” साथ में चल रहे प्रवासी मजदूर ठाकुर ने बताया की उन्हें रास्ते में खाना और पानी लोग दे रहे थे लेकिन उनके लिए जूते एक बड़ी दिक्कत पैदा कर रहे थे।

उन्होंने कहा, “मेरे जूते का सोल निकल रहा था इसलिए मैंने उसके ऊपर कपड़े का एक टुकड़ा बांध दिया है। हम एक या दो दिन भोजन के बिना चल सकते हैं, लेकिन इस स्थिति में बिना जूतों के चलना असंभव है।” दोनों प्रवासी मजदूर पैसे लेने से मना करते हुए कहा की वो चप्पल कहा से खरीदेंगे। जब कोई दुकान हिओ नहीं खुली रहेगी।

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