Migrant labourers leave Mumbai Surat in packed trains fearing lockdown

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कोरोना वायरस के मामलों में अचानक तेजी के बीच अब लोगों के मन में लॉकडाउन को लेकर डर गहराता जा रहा है। लॉकडाउन को लेकर डर प्रवासी लोगों में कितना ज्यादा है, इसकी झलक महाराष्ट्र और गुजरात से यूपी-बिहार जाने वाली ट्रेनों में देखी जा सकती है। कोविड-19 मामलों में अचानक हुई वृद्धि के कारण एक और लॉकडाउन की आशंका के बीच प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों ने महाराष्ट्र के मुंबई और गुजरात के सूरत और अहमदाबाद से लौटना शुरू कर दिया है। लॉकडाउन की आशंका के बीच मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर ट्रेनें प्रवासी श्रमिकों से खचाखच भरी देखी जा रही हैं।  

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए एक माइग्रेंट वर्कर (प्रवासी श्रमिक), जो उत्तर प्रदेश अपने घर लौट रहा है, ने कहा कि यह ट्रेन गोरखपुर जाएगी। हम शहर छोड़ रहे हैं, क्योंकि कोरोना के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में स्थित अपने शहर जा रहे एक अन्य प्रवासी श्रमिक ने बताया कि हम अपने शहर यूपी जा रहे हैं। यहां अभी नाइट कर्फ्यू है। यहां कभी भी लॉकडाउन हो सकता है। पिछले लॉकडाउन की तरह अफरातफरी से बचने केलिए हम अपने घर जा रहे हैं। हमें भी नहीं पता कि हम वापस कब आएंगे। 

बता दें कि आज से मुंबई, पुणे और नागपुर समेत महाराष्ट्र के सभी शहरों और जिले में लॉकडाउन शुरू होगा। आज रात आठ बजे से लेकर सोमवार सुबह सात बजे तक पूरा महाराष्ट्र वीकेंड लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू की जद में रहेगा। यह पहला वीकेंड है जो पूरी तरह से लॉकडाउन में रहेगा। जरूरी सेवाओं के अलावा किसी को भी इस दौरान आवाजाही की इजाजत नहीं होगी। मुंबई प्रशासन ने इसके लिए अलग से गाइडलाइन भी जारी की है। 

इधर, गुजरात में कोविड-19 मामलों में अचानक हुई वृद्धि के कारण एक और लॉकडाउन की आशंका के बीच प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों ने राज्य के सबसे ज्यादा प्रभावित दो शहरों सूरत और अहमदाबाद से लौटना शुरू कर दिया है। हालांकि, सरकारी अधिकारियों ने गुरुवार को दावा किया कि शहरों को छोड़कर जाने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है और लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने से नहीं रोका जा सकता है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (श्रम और रोजगार) विपुल मित्रा ने बताया,‘ऐसी कोई औपचारिक रिपोर्ट नहीं है जिससे यह पता चले कि बड़ी संख्या में प्रवासी वापस लौट रहे हैं। हालांकि, हमने जिला अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि श्रमिकों को कोई परेशानी न हो।’ उन्होंने कहा कि क्योंकि लॉकडाउन नहीं है और रेलगाड़ियां भी चल रही हैं, इसलिए लोग देश में कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र हैं। मित्रा ने कहा कि हालांकि कुछ लोग अपने मूल स्थानों पर वापस जा रहे हैं, लेकिन ऐसा बड़े पैमाने पर नहीं हो रहा है। अधिकारी ने कहा,‘पिछले साल, भीड़ उमड़ पड़ी थी क्योंकि लॉकडाउन अचानक लगाया गया था। इस बार, एहतियात के तौर पर, प्रवासी घर वापस जा रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि कुछ समय बाद परिवहन के साधन उपलब्ध नहीं हो सकेंगे।

लॉकडाउन लगने से फंसने का भय
जोनल रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति के सदस्य योगेश मिश्रा ने कहा कि प्रवासियों को आशंका है कि यदि सरकार एक और लॉकडाउन लगाती है तो वे यहां फंस सकते हैं। उन्होंने कहा,,‘गुजरात उच्च न्यायालय ने हाल ही में सुझाव दिया था कि लॉकडाउन लगाया जाना चाहिए। इससे प्रवासी कामगारों में घबराहट पैदा हो गई है, जिन्हें पिछले साल अचानक लगाए गए लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंधों के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था।’

उत्तर प्रदेश के लोग बड़ी संख्या में जा रहे हैं
मिश्रा ने कहा कि अब, प्रवासी श्रमिक अपने मूल स्थानों तक पहुंचने की जल्दी में हैं। उन्होंने कहा,‘उत्तर प्रदेश के लोग बड़ी संख्या में जा रहे हैं, क्योंकि वहां 15 अप्रैल से पंचायत चुनाव शुरू हो रहे हैं। ज्यादातर लोगों ने शादी समारोहों की योजना बनाई हुई है जिन्हें पिछले साल रद्द कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि लोग इस समय अतिरिक्त सतर्क हैं और किसी भी यात्रा प्रतिबंध की घोषणा से पहले शहरों से जाना चाहते हैं।





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